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दुनिया के लाख दुःख दूर लखी एक मुख / अनिल शंकर झा

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दुनिया के लाख दुःख दूर लखी एक मुख
पावी लै छी सब सुख झूठ नै बताय छी।
फूलोॅ के सुगंध रं प्रीत केरोॅ सब क्षण
मह-मह तन-मन ऐ सें ही कराय छी।
मदिर लहर पर फूलोॅ केरोॅ सेज पर
हाले-हाले गीत पर सुधि बिसराय छी।
प्रीत तोरोॅ संग लेली पैहलोॅ उमंग लेली
बार-बार देव लोक छोड़ी यहाँ आय छी॥