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दुनिया सुहानी रात सजलोॅ छै सेज जेकां / अनिल शंकर झा

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दुनिया सुहानी रात सजलोॅ छै सेज जेकां
एक पर एक फूल रूप गुण खान सें।
एक-एक क्षण एक प्रेयसी समान लागै
अमृत कलश लेनें सोन अधरान सें।
आदमी के पोर-पोर प्यासलोॅ जुगोॅ सें आरू
पियै लेॅ सिसोही केॅ अकुलेलोॅ प्राण सें।
लेकिन ठोरोॅ सें ठोर मिलना मुहाल लागै
बाहरोॅ आ भीतरोॅ के जड़ता के भान सें॥