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दुमहा / रूप रूप प्रतिरूप / सुमन सूरो

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चुह चुह धोती लाल रेशमी कुर्त्ता गंजी जाली छै,
हँसमुखिया के भरलोॅ ठोरोॅ में सुगना के लाली छै,
गीत-लाद के मस्ती में पुरजोश उमरिया बारी छै,
मन में एक्के बात दुल्हनियाँ गोरी छै कि कारी छै।

उठलोॅ छुरिया नाक, सेमता वर्ण गाल में पानी छै,
काजर सें भरलोॅ आँखी में छल-छल मस्त जवानी छै,
उगलोॅ छै मिस्सी चेहरा पर भरलोॅ लाज-लाजारी छै
मन में एक्के बात दुल्हनियाँ गोरी छै कि कारी छै।

चचलोॅ छै बारात गहागह हँसी-खुशी के मेला छै
कासा सें मह-मह काया कि फुललोॅ जूही-बेला छै
बाजा-गाजा नाच-तमाशा डोली-बैल सवारी छै
मन में एक्के बात दुल्हनियाँ गोरी छै कि गारी छै।

दप-दप दुधिया रात, हवा भरली मौगी मतबौरी छै,
गोरका चान, उजरकी बदली, खेलै नुक्का-चोरी छै
टुन-टुन-टुन-टुन बरद चलै छै, जमुआ के टिटकारी छै;
मन में एक्के बात दुल्हनियाँ गोरी छै कि गारी छै।

आरो कत्तेॅ दूर जनकपुर आरो कत्तेॅ देरी छै?
जल्दी-जल्दी पैर बढ़ाबोॅ केन्होॅ फेरा-फेरी छै?
रस्तां सौंसे रात गमाना की कोनो बुधियारी छै?
कखनी देखबै जाय दुल्हनियाँ गोरी छे कि कारी छै।

आबेॅ पास-पड़ोस जनकपुर आरो थोड़ोॅ देरी छै
धुम्मा सें बछबा केॅ करना तनटा फेरा-फेरी छै
दहिना काटी गाड़ी हाँकोॅ बामा खच्चा भारी छै।