भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

दूध वाले भैया / रमेश तैलंग

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

दूध वाले भैया! बता दो बस इतना।
दूध में पानी मिलाते हो कितना?

जमती नहीं थोड़ी-सी भी मलाई,
आकर कभी देख लो तुम ही भाई,
टोके तुम्हें कोई हर दिन तो कितना?

बतलाओगे जो अगर सच्ची-सच्ची,
होगी न अम्माँ से फिर माथा-पच्ची,
अच्छा नहीं होता झगड़ा भी इतना।

माना बढ़ी है इधर कुछ महँगाई,
फलती है ईमान की पर कमाई,
गड़बड़ घोटाला करो जी न इतना।