देखकर उसको अचानक उसमें खोया रह गया
आँख में आँसू लिए मैं मुस्कुराता रह गया
वापसी के वक़्त कुछ भी कह नहीं पाया था मैं
और अब ये सोचता हूँ हाय क्या-क्या रह गया
उसकी यादों ने कुछ ऐसे कान मेरे भर दिए
रात भर मैं नींद से झगड़ा ही करता रह गया
क्या बताऊँ आपको बदक़िस्मती की दास्तां
साथ होकर भी नदी के मैं तो प्यासा रह गया
नम हैं आँखें और लब ख़ामोश हैं कुछ रोज़ से
इश्क़ कर के मैं भी कुछ इतना अकेला रह गया
ये ग़नीमत है कि हम जैसे अभी ज़िंदा हैं लोग
वरना दुनिया में मुहब्बत का दिखावा रह गया
इसको अगली बार मैं शायद मुकम्मल कर सकूँ
अब के जो ये इश्क़ का पन्ना अधूरा रह गया