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देव उवाच / कीर्ति चौधरी

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उज्ज्वल हैं, उज्ज्वल लेंगे, उज्ज्वलतर देंगे--
माणिक-मुक्ता बोएँगे, जी भर काटेंगे ।
करने दो मंथन उनको यदि बड़ा चाव है--
अमृत तो हम लाएँगे, सबको बाँटेंगे ।