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द चाइल्ड इज द फ़ादर आफ़ द मैन / अज्ञेय

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तरुण अरुण तो नवल प्रात में ही दिखलाई पड़ता लाल-
इसीलिए मध्याह्न में अवनि को झुलसाती उसकी ज्वाल!
मानव किन्तु तरुण शिशु को ही दबना-झुकना सिखला कर
आशा करते हैं कि युवक का ऊँचा उठा रहेगा भाल!

लाहौर, 4 अप्रैल, 1934