भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

धरती पर सब ठीक-ठाक है / एन. सिंह

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

धरती पर सब ठीक-ठाक है, पर हलचल अख़बारों में
बुद्धि कैसे बिकती है, ये देखो भरे बाज़ारों में

सदियों तप कर-करके तुमने घृणित अर्थ को शब्द दिये
वही शब्द तो बदले हैं, अब शब्दों से हथियारों में

आहत अहं नकार रहा है, परिवर्तन की आँधी को
कुछ बदला है वे कहते हैं, लेकिन महज़ इशारों में

वे सिर जोड़े सोच रहे हैं, बालू की दीवार बने
या फिर कैसे छेद बने, उन मज़बूत किनारों में

नादान नहीं अपमानित-जन, अपना दुश्मन पहचान लिये
अब वो सज्दा नहीं करेंगे, धर्मों के दरबारों में