भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

धीरे-से मुसकाती चिड़िया / प्रकाश मनु

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मुझको तो अच्छी लगती है,
हरे लॉन पर गाती चिड़िया।

चहक-चहककर जब गाती है
पंख खोलकर उड़ जाती है,
तब लगता है आसमान को
धरती पर ले आती चिड़िया!

पता नहीं, यह कब सोती है
सारी रात कहाँ होती है,
बड़े सवेरे जग जाती है
मुझको रोज जगाती चिड़िया

जब मैं खूब प्यार से हँसता
इससे मन की बातें कहता,
मम्मी, मुझको तब लगता है,
धीरे-से मुसकाती चिड़िया!