भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

धूप / रमेश तैलंग

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

लि‍ए हाथ में फूल छड़ी।
आँगन में है धूप खड़ी।

झरने जैसी झरती है।
आंख-मि‍चौली करती है।

पर्वत पर चढ़ जाती है।
सागर पर इठलाती है।

दि‍न भर शोर मचाती है।
शाम ढले सो जाती है।