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धूप / सरस्वती माथुर

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1
चंचल धूप
हवा घोड़े पे बैठ
उड़ती फिरे

2
जागा सूर्य तो
धोया था सुबह ने
धूप से मुंह

3
धूप गोरैया
फुदक आंगन में
चढ़ी मुंडेर


धूप किरणें
फेनिल लहरों में
स्नान करतीं

5
तपा आकाश
नभ से छिड़कता
धूप की बूँदें

6
धूप पतंग
साँझ के कंधे पर
अटक गयी

7
रात स्याही
भोर के कागज पे
धूप कलम

8
धूप की कूची
चित्रकारी करता
गर्मी का दिन

9
निठूर बड़े
गर्मी के दिन आये
धूप करारी

१०
धूप के मोती
तरु गले लटके
माला के जैसे