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धेरैधेरै रहरहरू / सुमन पोखरेल

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धेरै धेरै रहरहरू तर प्राप्ति गाह्रो भो'
मेरै इच्छा आज किन विवशताको तारो भो'

छातीमा विश्वास जलेपछि
एक्लोपन शायद प्यारो भो'
सपना पानीझैँ बहिपछि
आँसु झर्न के गाह्रो भो'

खुसी खरानी भै जलिसक्दा
शायद बाँकी अँध्यारो भो
माया चोट भई बसेपछि
मुटु दुख्न के गाह्रो भो'

खुसी खरानी सपना पानी
जिन्दगी नै अफ्ठ्यारो भो'
पीरले बोली रोकेपछि
ओठ टोक्न के गाह्रो भो'