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धोबिया धोवे धोबी-घाट आली / रसूल

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रसूल का यह गीत अधूरा है, आपके पास हो तो इसे पूरा कर दें

धोबिया धोवे धोबी-घाट आली
सत् के साबुन, प्रेम के पानी,
नेह के मटकी में संउनन[1] डाली ।

पाप,पुण्य के धोवे धोबिया,
सत् के घाट पर धोवे धोबिया,
सूखे धरम के डाली ।

धोबिया धोवे धोबी-घाट आली ।

(यह गीत रसूल के 'धोबिया-धोबिनिया' नाटक में शामिल था)

शब्दार्थ
  1. पानी, साबुन और कपड़े को मिलाकर मसलना