भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

धो कर / रणजीत

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

हिन्दी शब्दों के अर्थ उपलब्ध हैं। शब्द पर डबल क्लिक करें। अन्य शब्दों पर कार्य जारी है।

धो कर स्वच्छ किये रखता हूँ
मैं अपने प्रत्येक अंग को प्रतिदिन
इस प्रत्याशा में कि न जाने
कब किस झड़प के बाद अचानक
उमड़े उच्छृंखल प्यार तुम्हारा
और न जाने
इनमें से कब
किस-किस की किस्मत खुल जाए-
मिल जाए वरदान तुम्हारी
दृष्टि, स्पर्श, चुम्बन का।