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नंढियूं कविताऊं / माया राही

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1.

हयाति मूंखे आणे, अजु
उन चौवाटे ते बीहारियो आ
जंहिंजे चइनि ई वाटुनि तें
‘नो एन्ट्री’ जो बोर्डु आ।

2.

ग़ल, गिला, शिकवा शिकायत
अखियुनि हो सभु कुझु चयो
बुधन्दड़ निगाहुनि जो पर
ध्यानु अलाए किथे हुयो!

3.

वहन्दीअ वाट त
निंड हुई मूं लाइ
के बयाबान हा शायद
मुक़दर में मुंहिंजे!