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नटखट हम हाँ नटखट हम / सभामोहन अवधिया 'स्वर्ण सहोदर'

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नटखट हम हाँ, नटखट हम, करने निकले खटपट हम।
आ गए लड़के पा गए हम, बंदर देख लुभा गए हम।
बंदर को बिचकाएँ हम, बंदर दौड़ा भागे हम।
बच गए लड़के, बच गए हम!

बर्र का छत्ता पा गए हम, बांस उठाकर आ गए हम।
छत्ते लगे गिराने हम, ऊधम लगे मचाने हम।
छत्ता छूटा बर्र उड़े, आ लड़कों पर टूट पड़े।
झटपट हटकर छिप गए हम, बच गए लड़के बच गए हम!

बिच्छू एक पकड़ लाए, उसे छिपाकर ले आए।
सबक जाँचने भिड़े गुरु, हमने नाटक किया शुरू।
खोला बिच्छू चुपके से, बैठे पीछे दुबके से।
बच गए गुरु जी खिसके हम, पिट गए लड़के बच गए हम!

बुढ़िया निकली पहुँचे हम, लगे चिढ़ाने जम जम जम।
बुढ़िया खीजे डरे न हम, ऊधम करना करें न कम।
बुढ़िया आई नाकों दम, लगी पीटने धम-धम-धम।
जान बचाकर भाग गए हम, पिट गए लड़के, बच गए हम।