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नदी अहल्या / रंजना जायसवाल

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मैं नदी हूँ
रास्ता बनाना जानती हूँ
उतर आती हूँ
ऊँचे पहाड़ों से
ढकेल देती हूँ
शिलाओं को
गिरती हूँ
ऊँचे प्रपातों से
वनों और कन्दराओं में
भूल जाती हूँ रास्ता
रूकती नहीं
बढ़ती रहती हूँ निरन्तर
कोई नहीं आता
मुझे राह दिखाने
रास्ता खुद बनाती हूँ
और अपने बनाए
रास्तों से
पहुँचती हूँ
समुद्र तक
मैं नदी हूँ।