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नदी देखों नदी देखों नदी तिलजुगबा कोसी गो देखि / अंगिका

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

नदी देखों नदी देखों नदी तिलजुगबा कोसी गो देखि
मैया जीवो थर थर काँपे, कोसी गो देवी ।
सगरे समैया कोसी माय उठि बैठि गमैलियै-गे मैया भादो मासे
साजले बारात कोसी माय गे देवी ।
जब तहूँ आहे कोसिका सलहेस देखले आवैत-
घाटे घाटे, नैया राखले छपाय, कोसी गो देवी ।
जब तहूँ आहे कोसिका नैया छपैले-
हाथी चढ़ि भैया उतरव पार
कोसी गो देवी ।
जब तहूँ आहे सूड़िया हाथी चढ़ि उतरबे
माझे धारे-हाथी देबौ डुवाय
माझे धारे ।
जब तहूँ आहे कोसिका हाथी दूड़ैव-
सीरा में बान्ह देवो बन्हाय-
मैया कोसी गे देवी ।
जब तहूँ आहे सूड़िया बान्ह बन्हैव
तोड़िके-समुख धार देवो बनाय ।
घाट बाट चढ़यो मैया दशोनहा पान
घर गेने-देबौ पाठी कटाय ।
बेर तोरा परलौ लाखें लाख कबूल वे-
घर गेने जेवै बिसराय ।
मैया कोसी गे देवी ।
जातो मोरा जेतौ, प्रानो तन हततै
तैयो न विसख तोर नाम ।
तोही जितले मैया, हमें हारलो,
दे मैया पार उतारि ।
मैया कोशी गे देवी ।