भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

नन्ही गुड़िया मेरी / रमेश तैलंग

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

ओ पीले चन्दा की किरण !
ज़रा धीरे से,
धीरे से उतर,
कहीं जाग नहीं जाए यह नन्ही गुड़िया मेरी
रानी बिटिया मेरी ।

सरकी लो चूनर वह
सलमे-सितारों की,
नींद लगी सपनों के,
हारे कहारों की,
ओ नन्ही परियों की बहन !
कहीं जाग नहीं जाए यह नन्ही गुड़िया मेरी
रानी बिटिया मेरी ।

थमा तभी शोर,
अरे, जग ने चुप्पी साधी,
जल-जल के हुई देख,
सारी बात आधी,
ओ नीले अम्बर की दुल्हन !
ज़रा धीरे से,
धीरे से सँवर,
कहीं जाग नहीं जाए यह नन्ही गुड़िया मेरी
रानी बिटिया मेरी ।