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नया साल‌ / प्रभुदयाल श्रीवास्तव

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 नया साल सुंदर सपना,
हम तुम सबका है अपना|

 हममें बची बुराई जो,
चलो कहीं आयें दफना|

 हमें श‌पथ अब लेना है,
काम सदा अच्छे करना|

 अच्छाई के साथ रहें,
सदा बुराई से लड़ना||

 बहुत कठिन है डगर अभी,
 व्यर्थ काम में क्यों पड़ना|

 आयें राह में रोड़े तो,
उनसे निर्भय हो लड़ना|

 पथ पर आगे बढ़ना है,
नहीं किसी से अब डरना|

 पोखर तो ठहरा पानी,
बनकर नदी सदा बहना|