भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

नाख़ुदा! कुछ ज़िरे-तूफ़ाँ आज़माई भी दिखा / यगाना चंगेज़ी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

नाख़ुदा! कुछ ज़ोरे-तूफ़ाँ आज़माई भी दिखा।

फ़िक्रे-साहिल छोड़ लंगर डाल दे मजधार में॥


‘यास’! गुमराही से अच्छी ज़हमते-वामान्दगी।

डाल लो ज़ंजीर कोई पायेकज़-रफ़्तार में॥


पैबन्दे-ख़ाक होने का अल्लाह रे इश्तयाक़।

उतरे हम अपने पाँव से अपने मज़ार में॥


शरमिन्दये-कफ़न न हुए आसमाँ से हम।

मारे पडे़ हैं सायए-दीवारे-यार से॥


कहते हो अपने फ़ेल का मुख़्तार है बशर।

अपनी तो मौत तक न हुई अख़्तियार मैं॥


दुनिया से ‘यास’ जाने को जी चाहता नहीं।

वल्लाह क्या कशिश है इस उजडे़ दयार में॥