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नाम-ए-हबीब / मख़दूम मोहिउद्दीन

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नाम-ए-हबीब[1]

कहा है मुझसे जंगल की उन आवारा हवाओं ने
जो तेरी धड़कनों का तोहफ़ा मेरे पास लाती हैं ।

          के तुमको हुस्न की नामेहरबानी से शिकायत है ।
          तुम्हें कच्ची कली की बेज़बानी से शिकायत है ।
          गुन्ह ना‍आशनाओं[2] की जवानी से शिकायत है ।

कहा है मुझसे जंगल की उन आवारा हवाओं ने
जो तेरी धड़कनों का तोहफ़ा मेरे पास लाती हैं ।

          सुना है ज़ब्त[3] को तुम दिल की संगीनी[4] समझते हो ।
          अदाए ख़ौफ़े-रुसवाई[5] को ख़ुदबीनी[6] समझते हो ।
          ये क्या सच है मेरे आँसू की रंगीनी समझते हो ।

कहा है मुझसे जंगल की उन आवारा हवाओं ने
जो तेरी धड़कनों का तोहफ़ा मेरे पास लाती हैं ।

          जुनूँ परवर अदाओं[7] से सँवरने के इरादे हैं ।
          ख़ुदा के अर्शे-उलफ़त[8] से उतरने के इरादे हैं
          ज़मीन-ओ आसमाँ को एक करने के इरादे हैं

कहा है मुझसे जंगल की उन आवारा हवाओं ने
जो तेरी धड़कनों का तोहफ़ा मेरे पास लाती हैं ।

शब्दार्थ
  1. प्रेम-पत्र
  2. पाप से अपरिचित
  3. संयम
  4. कठोरता
  5. बदनामी के दर की अदा
  6. स्वयंदर्शन
  7. पागलपन वाली अदाएँ
  8. ईश्वर के प्रेम रूप प्रकाश से