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नाम के नदिया बहैबै, जनम फल पैबै हो / करील जी

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नाम के नदिया बहैबै, जनम फल पैबै हो॥धु्रव॥
जनम-जनम के मल के ढेरी।
सहजहिं सकल बहैबै।जनम.॥1॥
कोटिन गंग-नहानहुँ ते बड़।
अमित परमरस पैबै।जनम.॥2॥
उमगि-उमगि आनन्द-मगन मन।
सुरगन केॅ ललचैबै।जनम.॥3॥
विषय-अगिनि-झुलसल जुग-जुग के।
जिय के जरनि जुड़ैबै।जनम.॥4॥
तजि जग, कुंज ‘करील’ हुलसि उर।
स्यामसुन्दर पिया पैबै।जनम.॥5॥