भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

नाम बिना तन कोन काम रे / संत जूड़ीराम

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

नाम बिना तन कोन काम रे।
निकसी स्वाश आश सब छूटी काम न आवत तनक चाम रे।
मद हंकार द्रोह काया में भूल रहो धन धवल धाम रे।
अरुभु रहो जंजाल जाल में जौन भयो हर को हराम रे।
जूड़ीराम नाम के सुमरे सब विधि पूरन होत काम रे।