Last modified on 22 अप्रैल 2014, at 14:23

नाव, उदासी, जीवन / विपिन चौधरी

हलकी नीली लहरों पर सवार खाली
नाव को दूर जाते हुए देख

मुझे अपनी उदासी बेतरह याद आने लगी
दूर चली जाने वाली चीजों से उदासी यूँ न गुंथी होती
तो जीवन हरा होते-होते यूँ न रह जाता