निपट कपट की खान दुकानें खुली खुल गई,
छल बल छाया घोर जोर से गांठ घुल गई।
पाप ताप संताप बढावे ढ़ोंगी साधू,
बाजीगर बन गये दिखावें भैया जादू।
शिवदीन बचो इनसे सभी ये हैं पूत कपूत,
समय पाय खिच जायेगें इनके सगरे सूत।
राम गुण गायरे।
निपट कपट की खान दुकानें खुली खुल गई,
छल बल छाया घोर जोर से गांठ घुल गई।
पाप ताप संताप बढावे ढ़ोंगी साधू,
बाजीगर बन गये दिखावें भैया जादू।
शिवदीन बचो इनसे सभी ये हैं पूत कपूत,
समय पाय खिच जायेगें इनके सगरे सूत।
राम गुण गायरे।