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निर्णायक / शैलजा पाठक
Kavita Kosh से
वे निर्णायक की भूमिका में थे
अपनी सफ़ेद पगड़ियों को
अपने सर पर धरे
अपना काला निर्णय
हवा में उछाला
इज्जतदार भीड़ ने
लड़की और लड़के को
जमीन में घसीटा
और गाँव की
सीमा पर पटक दिया
सारी रात गाँव के दिये
मद्धिम जले
गाय रंभाती रही
कुछ न खाया
सबने अपनी सफ़ेद पगड़ी खोल दी
एक उदास कफन में सोती रही धरती
रेंगता रहा प्रेम गाँव की सीमा पर