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निष्काम के अवतार / मृदुल कीर्ति

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हे प्रभो!
उत्पत्ति, स्थिति और प्रलय
के अधिष्ठाता
सार्वभौम, अन्तर्यामी और समय
के प्रतिष्ठाता
तो, तुम हो
किन्तु
अर्जुन कहता है
हे परमेश्वर!
मेरे द्वारा आपका वह रूप
'इन आँखों से'
देखा जाना शक्य है —
किन्तु हे योगेश्वर!
आपके, ज्ञान, शक्ति, बल, वीर
करुणा, दया, निष्काम
और तेजयुक्त ऐश्वर्य रूप को
प्रत्यक्ष देखना चाहता हूँ.
श्री भगवानुवाच—
दिव्यं ददामि ते चक्षुः पश्य मे योगमैश्वरम।
किन्तु आज
हे! वासुदेव
वह दिव्य दृश्य
इन्हीं दृगों से,
बिना दिव्य दृष्टि के
विमूढ़ दृष्टा बने
आज हम सबने
वह देखा जो तुमने
अर्जुन को सिखाया
जो अब तक कोइ
सीख भी नहीं पाया
कि
युक्तः कर्मफलं त्यक्त्वा शान्तिमाप्नोति नैष्ठिकीम
ऐसा
'कर्मयोगी'
निष्काम कर्मयोगी आज
उफनती लहरों को ललकारते हुए,
प्राण हथेली पर रखे हुए,
प्राणियों को बचाते हुए,
आज सब इनके अपने हैं
है कोई ऐसा समदर्शी
प्रत्युपकार विहीन कर्म
है कोई निष्काम कर्मी
अपने प्राणों की चिंता नहीं
है कोई प्राण निर्मोही
गीता का निष्काम
व्यक्तिकरण -इनमें समाया हुआ
निष्काम अवतरित हो गया.
सारे तीर्थ इनमें ही समा गये.
ये निष्कामी अवतार
स्वयं बद्री नाथ हो गये.
मृत्यु के मुंह से बचा लाया
जो सौ जिन्दगी
यह देवता और दानव का नहीं
यमदूत और देवदूत का
आमना सामना था.
सावित्री का यमदूत से सामना
केवल पति को बचाना था..
नचिकेता का यमदूत से सामना
केवल आत्मतत्व को जानना था.
गीता में तेरे ही शब्दों में
तेरे भक्त, केवल
मोक्षार्थी, आर्तार्थी या अर्थार्थी
पूजा करें तो भी स्वार्थी
क्योंकि वे मोक्षार्थी
इन सबसे अतिशय परे
सादा-सा अकल्पनीय

'बुद्धि भट्ट' निःस्वार्थी

जिस प्रकृति को तूने रचा
उसी का उद्भिन्न व्यक्तिकरण

'बुद्धि भट्ट'

मानवीय संताप से तप्त
तप के हिमालय सा तपस्वी

'बुद्धि भट्ट'

लहरों के हर आघात के उत्तर में
अनंत होता सा

'बुद्धि भट्ट'

एकत्व को मिटा कर समत्व
में समाहित

'बुद्धि भट्ट'

तुरीयातीत समाधि में लीन
समय के आर-पार जाता हुआ

'बुद्धि भट्ट'

उसकी तपोऋद्धि से तुम भी स्तंभित
से लग रहे हो वासुदेव!
निष्काम के उत्तंग शिखर पर आसीत्

'बुद्धि भट्ट'

आतुर हो गए न, आलिंगन को
सो लहरों की बाहों से बुला लिया
किन्तु एक बार उसकी माँ
यशोदा को भी
आलिंगन कर लेने देते तो
प्राण इतने विह्वल न होते.
इस असह्य संत्रास से घायल
चारों ओर फैला प्राण उद्वेलित

'बुद्धि भट्ट'

कैवल्य पुरुष को तुम्हारी प्रतीक्षा थी.
निष्काम 'सत्य काम' हो गया.
तुम्हारे साहस से अंतरिक्षों के
स्तब्ध परमाणु झंकृत हो उठे है.
ज्योतिर्वलय में समाहित तुम्हारी
कैवल्य ज्योति को नमन है.