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नेहा बरसल / धीरेन्द्र बहादुर 'चाँद'

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नेहा बरसल
धरती जागल
जागल जन के आशा
गावत हँसत किरिनिया आइल
भागल सघन निराशा
नेहा बरसल, धरती जागल
आसमान से
झरल बदरवा जानऽ
इन्द्रदेव के
फटल कलसवा मानऽ
माटी के
हरवाहा मचले जानऽ
मन में भरल हुलासा
नेहा बरसल, धरती जागल
मन के पट पर
सपना जनमल जानऽ
रंग-रंग के
रूप खिलल पहिचान
चक भाग के
ब पलटाइल जानऽ
छन में छंटल कुहासा
नेहा बरसल, धरती जागल
भूखे होरी
धनिया रोए जानऽ
धरती पर
टपकत लोहू पहिचानऽ
देख लहकत अगिन राह में मानऽ
जग के इहे तमाशा
नेहा बरसल, धरती जागल
मंजिल दूर न
बाटे दूर न
बाटे तू पहिचानऽ
धरती के
माटी भींगल तू जानऽ
शिव के डमरू
बाज रहल बा मानऽ
जन के ईंहे भासा
नेहा बरसल, धरती जागल