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पंडित राम मिलै सो कीजै / दादू दयाल

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पंडित राम मिलै सो कीजै।
पढ़ि-पढ़ि बेद पुराण बखाने,
सोई तत कहि दीजै॥टेक॥
आतम रोगी बिषय बियाधी,
सोइ करि औषध सारा।
परसत प्राणी होइ परम सुख,
छूटै सब संसारा॥१॥
ये गुण इंद्री अगिनि अपारा,
तासन जले सरीरा।
तन मन सीतल होइ सदा बतावौ,
जिहि पँथ पहुँचै पारा।
भूल न परै उलट नहिं आवै,
सो कुछ करहु बिचारा॥३॥
गुर उपदेस देहु कर दीपक,
तिमर मिटै सब सुझै।
दादू सोई पंडित ग्याता,
राम-मिलनकी बूझै॥४॥