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पपीहा बोलि जारे / पढ़ीस

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पपीहा बोलि जा रे !
हाली डोलि जा रे !
बादर बइरी[1] रूप बनावयिं
मारयिं बूँदन बान।
तिहि पर तुइ पिउ-पिउ ग्वहरावइ
हाँकन हूकु न, मानु।
पपीहा बोलि जा रे !
हाली डोलि जा रे !

तपि-तपि रहिउऊ तंपता साथी
लूकन लूक न लागि।
जागि रहे उयि कहूँ कँधैया
दागि बिरह की आगि।
पपीहा बोलि जा रे !
हाली डोलि जा रे !
छिनु-छिनु पर छवि हायि न भूलयि
हूलयि हिया हमार।
साजन आवयिं तब तुइ आये
आजु बोलु उयि पार।
पपीहा बोलि जा रे !
हाली डोलि जा रे !

शब्दार्थ
  1. वैरी, दुश्मन, शत्रु