भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

पप्पू जी ने रंग जमाया / प्रकाश मनु

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

पप्पू जी थे खूब रंग में,
पप्पू जी ने रंग जमाया।

गए फील्ड में, खेल-खेल में
ऐसा छक्का एक जमाया,
बॉल न आई हाथ, दर्शकों
का माथा था चकराया।
पप्पू जी सहवाग बने थे,
पप्पू जी ने रंग जमाया।

खेल कबड्डी हुआ पार्क में
पप्पू जी पहुँचे आगे,
ऐसे दावँ चलाए भाई
दौड़-दौड़कर सब भागे।
‘पप्पू जिंदाबाद’ हुआ फिर
सबने कंधे पर बैठाया।

ड्राइंग का घंटा आया तो
पप्पू जी का दिल घबराया,
भारी एक बनाया बस्ता,
चूहा उस पर एक बिठाया।
आहा! हँसकर टीचर बोलीं-
मैडल लेने पास बुलाया!