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परदेशी बलम / सुभाष चंद "रसिया"

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मेल-ईमेल कइके थक गइनी।
परदेसी बलम जी ना अइले।
रोज बोले मुंडेरवा पर कागा।
परदेसी बलम जी ना अइले॥

सहले सहाला ना हमसे जुदाई।
दिलवा के बात सखी केसे सुनाई।
उनके लखनऊ नगर रास आ गइले॥
परदेसी बलम जी ना अइले॥

पपीहा के बोली लागे जैसे गोली।
सावन बेदर्दी करेला ठिठोली।
मेघ जियरा जरावे आ गइले॥
परदेसी बलम जी ना अइले॥

सावन गुजर गइले भादो गुजरले।
अगहन पूस माघ सगरी गुजरले।
हाई बेदर्दी फगुनवा आ गइले॥
परदेसी बलम जी ना अइले॥

हाईटेक के ई भईल बा जमाना।
रसिया बेदर्दी हो गइले दीवाना।
वाट्सएप पर बलम अझुरा गइले॥
परदेसी बलम जी ना अइले॥