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पराती / भोजपुरी

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात


१.
हाथे लिहली खुरपी गड़ुअवे जुड़ पानी
चलली मदोदर रानी दावना छिरके पानी
टूटि गइले खुरपी, ढरकि गइले पानी
रोयेली मदोदर रानी, कवना छिनारी के बेटा रहलन फुलवारी
हम ना जननी ए रनिया राउरे फुलवारी
केकर घोड़वा माई रे ओएडें-गोएड़ें जाय
केकर धोड़वा माई रे सोझे दउड़ल जाए
ससुर भसुर के घोड़वा ओएड़े-गोएड़े जाय
कवना दुलहवा के घोड़वा माई रे सोझे उदड़ल जाय
रोयेली कवन सुभई मटुकवे पोंछे लोर
हँसेले कवन दुलहा, मुँहे खाले पान।

२.
मोर पिछुअरवा रे घन बंसवरिया
कोइलर बोले अनबोल,
सुतल रजवा रे उठि के बइठऽले
पसिया के पकड़ लेइ आउ रे
हँकड़हु -डँकड़हु गाँव-चकुदरवा
राजा जी के परे ला हँकार ए
कि राजा मारबि कि डांड़बि कि नग्र से उजारबि ए
नाहिं हम मारवि नाहिं गरिआइबि
नाहिं हम नग्र से उजारबिए।
जवना चिरइया के बोलिया सोहावन,
उहे आनि देहु रे।
डाढ़ि -डाढ़ि पसिया लगुसी लगावे,
पाते -पाते कोइलर लुकासु रे,
जेहिसन पसिया रे लवले उदबास, (उदबास=बेचैनी)
मुओ तोर जेठका पूतऽ ए।
तहरा के देब चिरई सोने के पिंजड़वा
खोरन दुधवा आहार रे।
जेहिसन पसिआ रे हमें जुड़वले
जिओ तोर जेठका पुतऽ रे।

३.
हम तेहि पूछिले सुरसरि गंगा, काहे रउआ छोड़िले अरार हे।
पिया माछर मारे ला बिन रे मलहवा,
ओहि मोरा छोड़िले अरार रे।
डालावा मउरिया लेके उतरे कवन समधी,
सोरहो सिंगार ले के उतरे कवन भसुर,
ओहि मोरा ढबरल पानी।

४.
ए जाहि रे जगवहु कवन देवा, जासु दुहावन।
ए दुधवा के चलेला दहेंडिया त,
मठवा के नारी बहे।
ए हथवा के लिहली अरतिया त,
मुँह देखेली सोरही सनेही।
ए जहि रे जगवहु कवन देही, जासु दुहावन।
ए हथवा के लिहली अरतिया, त
सोरही सनेही आरती निरेखेली ए। जाहिरे...

५.
आईं ना बरहम बाबा, बइठीं मोरे अंगनवा हे,
देबऽ सतरजिया बिछाइ ए।
गाई के घीव धूम हूम कराइबि,
आकासे चली जास ए।
आईं ना बरहम बाबा, बइठीं मोरे अंगनवा हे।
देबऽ सतरजिया बिछाई ए।
गाई के गोबर .. कब जग उगरिन होसु ए।
आईं ना काली माई, बइठीं मोरे अंगनवाँ हे,
देबऽ सतरजिया बिछाइ ए,
गाई के घीव धूम हम कराइबि,
कब जग उगरिन होसु हे।