भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

पहचान / ईहातीत क्षण / मृदुल कीर्ति

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अचानक बेमालूम ही तुमसे जुडी हूँ
तुम्हें जान सकूं ,
यह जानने को गंतव्य से मुडी हूँ.
पर!
तुम तो धुप की तरह खिसक गए
शाम !
लो रात आ गयी .
कल फ़िर धूप आयेगी
अब में तुमसे पहले खिसक गयी हूँ.
क्योंकि अब में तुम्हें पहचान गयी हूँ.