भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

पहिला दरद जब आयल, सासु गोड़ लागले हे / मगही

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

पहिला दरद जब आयल, सासु गोड़[1] लागले हे।
सासु, अब न करम अइसन[2] काम, दरद अँग सालइ[3] हे॥1॥
दोसर दरद जब उठल, ननदी गोड़ लागल हे।
ननदी, अब न जयबइ सामी सेज, दरद हिया सालइ हे॥2॥
तेसर दरद जब उठल, होरिला जलम लेल हे।
बजे लागल अनन्द बधइया, महल उठे सोहर हे॥3॥

शब्दार्थ
  1. गोड़ लागल = पैर पड़ना, प्रणाम किया
  2. इस तरह का
  3. सूल देना, दर्द करना