भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

पाँच बधावा म्हारे ये भल आया / मालवी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

पाँच बधावा म्हारे ये भल आया
आया तो कई ऐ म्हारा देस में
पेलो बधावो म्हारा ससरा घर भेज्यो
दूसरो बधावो म्हारा बाप क्यां
तीसरो बधावो म्हारा जेठ क्यां भेज्यों
चौथो बधावो म्हारा बीर क्यां
पाँचबो बधावो धन री कूंख से लाणी
जासे सरब सुख होय हो
ससरा सपूतां सूं सरंबद रेस्यां
बापरे बल आपने
सासू सपूती सूं सरबद रेस्यां
माय रे बल आपने
देवर-जेठ सूं सदबद रेस्यां
लाज रे बल आपने
देराणी-जेठाणी सूं सदबद रेसयां
काम रे बल आपने
ननंद भानेजां सूं सदबद रेस्या
बुगचा रे बल आपने
स्वामी सपूतां सूं सदबद रेसयां
रूप रे बल आपने
भर-भर नैनां आज सूती
धीय बोलाई सासरे
नवरंग पेलो आज पेरियो पूत परण घर आविया
सुखदेव टूटिया, इच्छा पूरी
मन मनोरथ पाविया।