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पाकर रोटी दाल, मैं ख़ुश हूँ / रामश्याम 'हसीन'

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पाकर रोटी दाल, मैं ख़ुश हूँ
जैसा भी है हाल, मैं ख़ुश हूँ

दाना देकर या न देकर
जैसे भी तू पाल, मैं ख़ुश हूँ

प्यार, महब्बत, दौलत, शोहरत
काट के सारे जाल, मैं ख़ुश हूँ

जो भी मुझसे कहे ज़माना
इसकी बातें टाल, मैं ख़ुश हूँ

देखके धरती, अम्बर, पंछी
नदिया-नाले-ताल, मैं ख़ुश हूँ