भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

पाडो / रूपसिंह राजपुरी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

पक्को राग गाण लागयो,
कब्बाल जी बाडो।
खूब लम्बी हेक काडी,
जोर लगायो डाडो।
रामूड़ै गी दादी,
बोली, बस कर लाडी।
काल ईंयां ई अरड़ायो हो,
अर मर गयो म्हारो पाडो।