भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

पातर-पातर गोरिया के पतरी कमरिया / भोजपुरी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: महेन्द्र मिसिर

पातर-पातर गोरिया के पतरी कमरिया
मोर सँवरिया रे पतरी डगरिया धैले जाय
पातर लप-लप गोर पतरी अंगुरिया
मोर सँवरिया रे लचकत पनिया के जाय
सड़िया के आरी-आरी गोटवा के जारी
मोर सँवरिया रे मटकत रहिया के जाय
गावेले महेंदर मिसिर दूहो रे पुरुबिया
मोरे सँवरिया रे, देखते में जिया ना अघाय।