पानी / सुधीर कुमार 'प्रोग्रामर'

मत फेकोॅ जानी के पानी
राखोॅ खुच्चों खान्हीं-खन्हीं
दिक्कत होला से पहिनें सब
चलॉे बचाबॉे कनकन पानी।

जब भी पीयोॅ छानी-छानी
खूब सीसोहोॅ टटका पानी
नो बजथैं सूतै के घरिया
तानोॅ पहिनें मच्छरदानी।

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