भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

पिंजरा टूटी गयो रमा उड़ी गयो मायु / कोरकू

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

पिंजरा टूटी गयो रमा उड़ी गयो मायु
पिंजरा टूटी गयो रमा उड़ी गयो मायु
रामा सरिका बोले रे बेटा म्हारो कलेजा टूटे
पेप रे पाला जोमेडो में माडो इयां बेटी
रेपे रेपे मांडिये
पान सुपारी जोमे डो इयां बेटी
रेपे रेपे मांडिये
काली ग्वाली किटी टाला
डून्डा ओड़ा टेगेन डो माय मारे
डून्डा ओड़ा टेगेन डो माय मारे
डून्डा ओड़ा चूटी तीये
रामा चाचू बनजा बेटा
आमा रानी का बोली वा जा बेटा मारे

स्रोत व्यक्ति - जगनसिंह, ग्राम - झापा