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पुरुष हिया थिक कमलक पात / मैथिली लोकगीत

मैथिली लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

पुरुष हिया थिक कमलक पात
परय प्रीति जल होअय कात
बहुत जतनसँ आँकल रोय
प्रेम लिखल तहि आखर दोय
नयनक काजर काढ़ल नाय
प्रेम बिकायल प्रेम बेसाह
पहिने कयल प्रीति उपचार
हम धनि अबला भेलौं देखार
के बुझ के बुझ विरहक बात
कुमर विरह जिब कयलक आँट