भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

पुलिस - दो / ओम पुरोहित कागद

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


मिनखां रा
सळ काढ़ण आळी उस्तरी
तप्यां पछै
बाळ देवै
इणी खातर
भला मिनख
इण री तपत देख‘र
पईसां रो छांटो देय‘र
दूर स्यूं ई
टाळ देवै !