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पुलिस / रूपसिंह राजपुरी

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पुलिस अलबादी छोरो ।
जके गे हाथ में डंडियों पाँच पोरो ।
कानी- कानी जेबां, महं माल नावड़े बोरो ।
जनता बोरडी गो पेड़,
ओ जद चढ़ ज्य बीं छोरे गे गेड़,
तो जित्ता डंडिया पड़े,
बित्ता ई बोरिया झड़े।