भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

पूरे चाँद की सज धज है शहज़ादों वाली / सरवत हुसैन

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

पूरे चाँद की सज धज है शहज़ादों वाली
कैसी अजीब घड़ी है नेक इरादों वाली

नई नई सी आग है या फिर कौन है वो
पील फूलों गहरे सुर्ख़ लिबादों वाली

भरी रहें ये गलियाँ फूल परिंदों से
सजी रहे तारों से ताक़ मुरादों वाली

आँखें हैं और धूल भरा सन्नाटा है
गुज़र गई है अजब सवारी यादों वाली