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पृष्ठ रीता है / आशुतोष द्विवेदी

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फिर नयन व्याकुल हुए हैं आज लिखने को नई कोई कहानी
रन हुआ है शांत, रणभू खोजती है प्यार की खोई निशानी
आज तक निष्कर्ष सम्मुख आ न पाया,
कौन हारा, कौन जीता है ?
अभी तक पृष्ठ रीता है


भीड़ है लेकिन कहीं गहराइयों में एक सूनापन छिपा है
श्वास की गति में हृदय की धड़कनों में गीत का जीवन छिपा है
बाँवरा मन रिक्तियों में प्रेम का पय
मस्त होकर आज पीता है
अभी तक पृष्ठ रीता है


धूर्तता कितनी अधिक है, हाय! जग ने काँच को कंचन बनाया
फिर दिया निर्दोष को विष और आँचल में किसी काजल लगाया
फिर हुई मीरा कलंकित, बाध्य जलने
के लिए फिर आज सीता है
अभी तक पृष्ठ रीता है


और इस निर्मम जगत में भी सदा ही प्रेम के हम गीत गाते
जानती हो तुम प्रिए, क्यों वेदना को गीत की भाषा बनाते?
सिद्ध करना है तुम्हारी अश्रुधारा
जान्हवी से भी पुनीता है
अभी तक पृष्ठ रीता है


पृष्ठ रीता है अभी तक, उस घड़ी तक पृष्ठ रीता ही रहेगा
जिस घड़ी मौसम तुम्हारे आगमन ही की सूचना हमसे कहेगा
बिन तुम्हारे फूल से कोमल हृदय पर
क्या कहें, क्या-क्या न बीता है ?
अभी तक पृष्ठ रीता है