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पेंजई-2 / त्रिलोक महावर

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युगोस्ला‍विया
पर तड़के बरसाए गए
बम और बगीचे की
मिट्टी भूरी से
लाल हो गई

बसंत आने पर
बगीचे में खिले
पेंजई[1] के फूलों को
देखते हुए लगा
टीटो के बच्चों के
स्‍केल्टगन हैं
एक-दो-तीन न जाने कितने
तितलियों-से वे
सवाल करते हैं
तितलियाँ पकड़ते-पकड़ते

वे
फूल कैसे हो गए ?

शब्दार्थ
  1. पेंजई के फूल बसंत में खिलते हैं। इन फूलों की पंखुडि़यों में मानव के सिर का कंकाल डरावना दिखाई देता है। इन फूलों को देखते हुए लगता है मानो बगीचे में स्केल्टन ही स्केनल्टेन पंखुडि़यों पर छा गए हैं।