भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

पेइचिंग : कुछ कविताएँ-6 / सुधीर सक्सेना

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

श्ये श्ये, पेइचिंग

श्ये श्ये!


हम फिर मिलेंगे

कभी न कभी

वांग फूलिंग स्ट्रीट पर

फिर पियेंगे हम स्वान-न्यू-नाय


चाए च्येन

अलविदा


फिर मिलेंगे

पेइचिंग

पहले मैं तुम-सा मुस्कराना तो सीख लूँ

हर मौसम में बेपनाह।


शब्दार्थ :

श्ये श्ये=धन्यवाद; स्वान-न्यू-नाय=लस्सी की तरह का एक चीनी पेय; चाए-च्येन=अलविदा।