भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

पेड़ों पर पैसे लगते हों / प्रकाश मनु

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अगर कहीं ऐसा हो जाए,
सचमुच खूब मजा आए।

जंगल में शाला खुल जाए
भालू बस्ता लेकर आए,
शेर बबर कुर्सी पर बैठा
उसको गिनती रोज सिखाए।

हाथी ले अखबार हाथ में
समाचार पढ़कर बतलाए!
अगर कहीं ऐसा हो भाई,
जंगल में मंगल हो जाए!

पेड़ों पर पैसे लगते हों
रसगुल्ले हों डाली-डाली,
खाएँ-पीएँ मौज करें हम
नाचें और बजाएँ ताली!

सूरज धरती पर आ जाए
सबको बिस्कुट-केक खिलाए,
अगर कहीं ऐसा हो जाए
हर दिन दीवाली मन जाए!